ज़ख़्मी पहाड़ के रिसते घाव
देख के रोये सारी कायनात
क़यामत पे सियासत हो रही
हाय री किस्मत कैसे हालात
बसेरे उजड़े अपने बिछड़े
लाचार किया तूने भोलेनाथ
अश्रु भरी अंकों में आशा
कहीं से आये कोई सौगात
तांडव मौत का हुआ शिवनगरी में
उजड़ी नगरी में बिछ रही राजनीति की बिसात
जीवन नैया पार लगाने को
कैसे आयेगी कोई सौगात
क़यामत पे सियासत हो रही
हाय री किस्मत कैसे हालात
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