Monday, 8 July 2013

ज़ख़्मी पहा

ज़ख़्मी पहाड़ के रिसते घाव 
देख के रोये सारी कायनात 
क़यामत पे सियासत हो रही
हाय री किस्मत कैसे हालात
बसेरे उजड़े अपने बिछड़े 
लाचार किया तूने भोलेनाथ 
अश्रु भरी अंकों में आशा 
कहीं से आये कोई सौगात 
तांडव मौत का हुआ शिवनगरी में 
उजड़ी नगरी में बिछ रही राजनीति की बिसात 
जीवन नैया पार लगाने को 
कैसे आयेगी कोई सौगात 
क़यामत पे सियासत हो रही
हाय री किस्मत कैसे हालात

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